34.4 मिलियन डॉलर सालाना कमाकर भी कोको गॉफ दुनिया के टॉप-50 सबसे ज्यादा कमाने वाले एथलीटों में जगह नहीं बना पाईं। फिर भी यह महिला खेलों में कमाई का नया हाई-पॉइंट है। 2025 की सूची साफ बताती है—टेनिस सबसे बड़े ब्रांड पैसे खींचता है, स्कीइंग और जिम्नास्टिक्स में भी स्टार वैल्यू बढ़ी है, और टॉप-10 में भारत की कोई महिला एथलीट नहीं है। यह सिर्फ रैंकिंग नहीं, बाजार की पसंद और संरचना की कहानी है। यकीन नहीं होता? Richest female athletes 2025 की तस्वीर यही कहती है।
2025 की टॉप कमाने वाली महिला एथलीटें: आंकड़े और नाम
नंबर-1 कोको गॉफ, उम्र 20, कुल आय 34.4 मिलियन डॉलर। इनमें 9.4 मिलियन प्राइज मनी और लगभग 25 मिलियन एंडोर्समेंट्स से। न्यू बैलेंस, हेड, अमेरिकन ईगल, लॉरियल और नेकेड जूस—गॉफ की ब्रांड लिस्ट बताती है कि जेन-ज़ी स्टार, साफ-सुथरी इमेज और लगातार प्रदर्शन कंपनियों के लिए कितनी आकर्षक कॉम्बो बनते हैं।
दूसरे नंबर पर पोलैंड की इगा स्वियातेक 23.8 मिलियन डॉलर के साथ। 8.8 मिलियन प्राइज मनी और करीब 15 मिलियन स्पॉन्सरशिप—रोलेक्स, पोर्श और लैंकॉम जैसे लक्ज़री ब्रांड। क्ले कोर्ट पर दबदबा और बड़े टूर्नामेंटों में स्थिरता ने उनके कमर्शियल ग्राफ को तेजी से ऊपर धकेला है।
तीसरे स्थान पर चीन को रिप्रेजेंट करने वाली फ्रीस्टाइल स्कीयर एलीन गू 22.1 मिलियन डॉलर के साथ। उनकी कमाई ज्यादातर एंडोर्समेंट से आती है—लुई वुइटन, टिफ़नी एंड को. जैसे हाई-फैशन ब्रांड उनके ग्लोबल और क्रॉस-कल्चरल अपील को भुनाते हैं। गू दिखाती हैं कि शीतकालीन खेल भी सही ब्रांड-फिट से मेनस्ट्रीम कमाई में घुस सकते हैं।
टॉप-10 में टेनिस का वर्चस्व बरकरार है। झेंग किनवेन, आर्यना सबालेंका, नाओमी ओसाका और एम्मा राडुकानु—ये नाम लिस्ट में हैं। गोल्फ से नेली कोर्डा की एंट्री इस बात का सबूत है कि महिला गोल्फ का स्पॉन्सरशिप आधार फैला है। वीनस विलियम्स अब भी 12.1 मिलियन डॉलर सालाना के आसपास कमा रही हैं—ज्यादातर ऑफ-कोर्ट बिजनेस और फैशन लाइन से, जो दिखाता है कि ब्रांड वैल्यू उम्र से नहीं, कहानी और भरोसे से चलती है।
अब नेटवर्थ की तरफ देखें। 2022 में प्रो टेनिस से रिटायर होने के बावजूद सेरेना विलियम्स लगभग 340 मिलियन डॉलर नेटवर्थ के साथ सबसे आगे हैं। नाइकी, गेटोरेड और विल्सन जैसे पार्टनरशिप, साथ में निवेश और उद्यम—सेरेना का उदाहरण बताता है कि खेल से परे, ब्रांड-निर्माण और इक्विटी हिस्सेदारी लंबी रेस का असली धन बनाती है।
जिम्नास्टिक्स में सिमोन बाइल्स का नेटवर्थ 2025 में करीब 25 मिलियन डॉलर बताया जाता है। उनकी सालाना एंडोर्समेंट इनकम 5–7 मिलियन डॉलर के दायरे में घूमती है। वीज़ा, एथलीटा, यूनाइटेड एयरलाइंस, SK-II, गैप, उबर ईट्स और GK एलीट—जहां वे अपना जिम्नास्टिक्स अपैरल लाइन को-क्रिएट करती हैं—ये पार्टनरशिप दिखाती हैं कि ओलंपिक स्टारडम ब्रांड बाजार में कितना टिकाऊ है।
ट्रैक एंड फील्ड में केन्या की फेथ किप्येगन सबसे आगे हैं। मार्च 2025 तक उनकी अनुमानित नेटवर्थ लगभग 5 मिलियन डॉलर है। तीन ओलंपिक गोल्ड और 2023 की रिकॉर्डतोड़ दौड़ें—कमाई का आधार प्राइज मनी, स्पॉन्सरशिप और सीमित लेकिन असरदार एंडोर्समेंट हैं। एथलेटिक्स में लावारिस नहीं, पर लीग-स्ट्रक्चर की कमी कमर्शियल ग्रोथ को सीमित रखती है।
यहां एक ठोस ट्रेंड दिखता है—प्राइज मनी से ज्यादा पैसा एंडोर्समेंट से आता है। टेनिस इसलिए आगे है क्योंकि—ग्लोबल कैलेंडर, चार ग्रैंड स्लैम की लगातार बड़ी स्टेज, टीवी फ्रेंडली फॉर्मेट, और स्टोरीटेलिंग के लिए क्लियर हीरोज। जिम्नास्टिक्स और स्कीइंग जैसे खेल ओलंपिक/वर्ल्ड चैंपियनशिप के पीक मोमेंट्स पर महंगी ब्रांड डील्स खींचते हैं, साल भर नहीं।
- कोको गॉफ: 34.4M डॉलर (9.4M प्राइज, ~25M एंडोर्समेंट); ब्रांड—New Balance, Head, American Eagle, L'Oréal, Naked Juice
- इगा स्वियातेक: 23.8M डॉलर (8.8M प्राइज, ~15M एंडोर्समेंट); ब्रांड—Rolex, Porsche, Lancôme
- एलीन गू: 22.1M डॉलर; ज्यादातर एंडोर्समेंट; ब्रांड—Louis Vuitton, Tiffany & Co.
- वीनस विलियम्स: ~12.1M डॉलर; ऑफ-कोर्ट वेंचर्स, फैशन और ब्रांड डील्स से
- अन्य टॉप-10 नाम: झेंग किनवेन, आर्यना सबालेंका, नाओमी ओसाका, एम्मा राडुकानु, नेली कोर्डा
एक जरूरी संख्या: कोको गॉफ की 34.4 मिलियन डॉलर सालाना कमाई अब तक मापे गए बेहतरीन स्पैल में गिनी जाएगी, फिर भी दुनिया के टॉप-50 सबसे ज्यादा कमाने वाले एथलीटों की कट-ऑफ से 19.2 मिलियन डॉलर कम है। यानी महिला खेलों की उड़ान तेज है, पर छत अभी और ऊंचाई पर है। वजह? मीडिया राइट्स में अंतर, लीग इकोसिस्टम की गहराई, और टीम स्पोर्ट्स में राजस्व हिस्सेदारी के मॉडल, जो पुरुष खेलों में दशकों से पके हुए हैं।
भारत की अनुपस्थिति: वजहें और आगे की राह
टॉप-10 में कोई भारतीय महिला एथलीट नहीं। यह सिर्फ प्रदर्शन की बात नहीं, बाजार संरचना की कहानी भी है। भारत में कॉर्पोरेट स्पॉन्सरशिप अभी भी पुरुष क्रिकेट की तरफ झुकी रहती है। महिला स्पोर्ट्स के लिए टीवी स्लॉट, प्राइम-टाइम प्रोडक्शन और सालभर का इवेंट कैलेंडर सीमित है, इसलिए एंडोर्समेंट का बड़ा हिस्सा ग्लोबल टेनिस या ओलंपिक आइकॉन तक ही पहुंचता है।
भारत के पास बड़े नाम रहे हैं—पीवी सिंधु, मीराबाई चानू, सायना नेहवाल, मैरी कॉम—पर ग्लोबल कमाई के इस स्तर तक पहुंचने के लिए तीन चीजें जरूरी हैं: लगातार वर्ल्ड-स्टेज प्रदर्शन, इंटरनेशनल ब्रांड पार्टनरशिप, और डिजिटल-फर्स्ट स्टोरीटेलिंग जो भारत से बाहर भी बिके। जब तक घरेलू लीग और फेडरेशन एथलीट-फर्स्ट कंटेंट, डेटा और फैन एंगेजमेंट में निवेश नहीं करेंगे, कमाई का ग्राफ ब्रेकआउट नहीं करेगा।
क्या बदला जा सकता है? बहुत कुछ।
- कैलेंडर और लीग: महिला खेलों के लिए सालभर चलने वाले टूर्नामेंट, क्लबहाउस-टाइप फ्रेंचाइजी, और पारदर्शी प्राइज मनी स्ट्रक्चर।
- ब्रांड-मार्केटिंग: एथलीट की कहानी—संघर्ष, पर्सनैलिटी, बिहाइंड-द-सीन्स—को लगातार कंटेंट में बदलना। ब्रांड सिर्फ मेडल नहीं, नरेटिव खरीदते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर: यूरोप/अमेरिका/एशिया के टॉप इवेंट्स में रेगुलर पार्टिसिपेशन से दृश्यता और ब्रांड फिट दोनों बनते हैं।
- स्कूल-यूनिवर्सिटी पाइपलाइन: प्रतिभा का चौड़ा बेस, खेल विज्ञान और चोट प्रबंधन पर निवेश, ताकि करियर लंबा और स्थिर रहे।
जेंडर पे गैप पर साफ तस्वीर भी देखें। टेनिस में ग्रैंड स्लैम पर बराबर प्राइज मनी ने महिलाओं को प्राइसिंग पावर दिया है, पर कुल राजस्व पारिस्थितिकी—मीडिया डील, टिकटिंग, स्पॉन्सरशिप—अभी भी पुरुष खेलों के पक्ष में भारी है। नतीजा यह कि महिला स्टार्स को अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा कोर्ट/फील्ड से नहीं, ऑफ-फील्ड से बनाना पड़ता है। कोको गॉफ और इगा स्वियातेक के आंकड़े यही दिखाते हैं—प्राइज मनी अच्छा है, असली छलांग एंडोर्समेंट से आती है।
2025 के ट्रेंड्स बतौर सिग्नल काम के हैं।
- टेनिस की पकड़ बनी रहेगी—ग्लोबल टूर, हाई-विज़िबिलिटी, और ब्रांड-फ्रेंडली फॉर्मेट।
- लक्ज़री ब्रांड्स की दिलचस्पी बढ़ी है—एलीन गू जैसे स्टार खेल और फैशन के बीच पुल बनते जा रहे हैं।
- जेन-ज़ी एथलीट की सोशल रीच—गॉफ/राडुकानु—ब्रांड्स को युवा बाजार तक सटीक रास्ता देती है।
- टीम स्पोर्ट्स में धीमी पर स्थिर ग्रोथ—गोल्फ और संभावित रूप से फुटबॉल/हॉकी में भी, बशर्ते टीवी और डिजिटल डील मजबूत हों।
भारत का मौका कहां है? जहां फैनबेस है, वहां वैल्यू कैप्चर करें—क्रिकेट से सीखें, पर उसी में सीमित न रहें। बैडमिंटन, हॉकी, एथलेटिक्स, शूटिंग, बॉक्सिंग—इनमें इंटरनेशनल पॉडियम दिख चुका है। अब जरूरत है ब्रॉडकास्ट क्वालिटी, स्टोरीटेलिंग और ब्रांड-एलाइनमेंट की। जब एथलीट सालभर चर्चा में रहता है, तब प्राइज मनी नहीं, पर्सनल ब्रांड पावर असली आय बनती है। और यही टॉप-10 की सूची हमें दो टूक बताती है।