नई दिल्ली में शुक्रवार को राजनीतिक परिदृश्य काफी उलझा हुआ था। सुबह से ही सरकारी इन्फोर्मेंट ऑफिसरों का कहना था कि स्थिति जितनी जल्दी संभव हो ठीक होगी, लेकिन तथ्य कुछ और ही थे। 25 मार्च 2026 को दोपहर 5 बजे संसद परिसर के भीतर एक ऐतिहासिक बैठक बुलाई गई। यहाँ बात थी बढ़ती पश्चिम एशिया संकट की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे पहले ही 'अनिवार्य संकट' (unprecedented crisis) बताया था। सरकार का मानना था कि अब किसी भी तरह के समझौते की जरूरत है। इसलिए केंद्र ने सभी दलों की बैठक का आह्वान किया।
संविदात्मक सुरक्षा परिदृश्य और सरकार का रुख
यह बैठक कोई आम नहीं थी। रक्षा मंत्री रajnath सिंह, भारत सरकार के रक्षा मंत्री ने इसकी अध्यक्षता की। साथ ही बाहरी मामलों के मंत्री एस. जयशंकर को भी अपडेट देने हेतु मौजूद रहने की आवश्यकता महसूस की गई। पश्चिम एशिया के वर्तमान हालात केवल भूगोल नहीं बदल रहे हैं, वे सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहे हैं। विशेष रूप से एलपीजी सिलेंडर की कमी और बाजार के उतार-चढ़ाव ने जनता की चिंता बढ़ा दी है। लोकसभा में कांग्रेस सांसद विजय वासंत ने सवाल उठाया था कि कहीं हम फिर पीड़ित तो नहीं बन रहे।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खाड़े जैसे प्रमुख नेता उस दिन वहां मौजूद नहीं थे। उनकी अनुपस्थिति को लेकर प्रेस में खामोशी नहीं रही थी। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि उन्हें पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण समय नहीं मिला। वहीं दूसरी तरफ, त्रिणामूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पूरी तरह से बैठक छोड़ी। उनके नेतृत्व में मैमाता बनर्जी ने स्पष्ट कहा कि जब संसद चल रही है, तो कॉन्फ्रेंस रूम में बैठक क्यों होनी चाहिए?
विपक्षी पार्टियों का बयानबाजी वाला खेल
राजनीतिक हलचल का असर थोड़ा और भी गहरा है। सोमवार को रायसेखा में कांग्रेस नेता जयराम रामेश्वर ने सरकार की नीति पर हमला बोल दिया। उन्होंने कहा कि संकट की दिशा को देखते हुए भारत को अपनी विदेश नीति में तेजी लानी चाहिए। सीपीआई(एम्) के जॉन ब्रिट्स ने 2003 के इराक युद्ध के संकल्प की ओर इंगित करते हुए कहा कि आज ईरान के मामले में भी वही भावना अपनानी चाहिए।
लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या सिर्फ बहस करने से चीजें बदलेंगी? टीएमसी ने महिला सशक्तिकरण क़ानून की शुरुआत पर भी वक्त नहीं दिया। ऐसा लगता है कि विपक्ष की जुगाड़ें बढ़ रही हैं। सरकार का दावा है कि यह ब्रीफिंग सेशन ताकि एकमत से आगे बढ़ा जा सके। हालांकि, कई ऐसे नेता भी थे जो जानते थे कि यह केवल प्रोटोकॉल का हिस्सा बन सकता है।
सुरक्षा तैयारी और रक्षा समीक्षा
पार्टी नेताओं की बैठक से ठीक पहले, 24 मार्च 2026 को रक्षा मंत्री ने एक अन्य महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। इसमें तीन सेना मुख्य अधिकारी शामिल थे। जनरल अनिल चौहान, जो अब रक्षा प्रमुख (CDS) हैं, उनका नाम भी सूची में था। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और डीआरडीओ चेयरमैन डॉक्टर समिर कमत भी मौजूद थे। इन सभी ने भारत की तैयारियों का गहन विश्लेषण किया।
पश्चिम एशिया के क्षेत्र में होने वाली हर घटना का सीधा असर भारतीय सैन्य स्ट्रैटेजी पर पड़ता है। इसलिए रक्षा मंत्रालय की यह बैठक बेहद जरूरी थी। यह केवल आपतकालीन योजना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सोच बना रही है।
इतिहास और संभावित प्रभाव
मिटा जाने वाले वर्ष के पहले हिस्से में 27 जनवरी को भी एक ऐसी ही बैठक हुई थी। पांडुलिप्य प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए उस समय किरण रिजिजू ने बजट सत्र की तैयारी के लिए बैठक बुलाई थी। उस सत्र का पहला दौर 28 जनवरी से शुरू होकर फरवरी तक चला। अब चूंकि सत्र 2 अप्रैल तक जारी है, इसलिए संसद में बहस का वातावरण बना हुआ है। राष्ट्रपति दroupadi murmu ने सदनों के सदस्यों को संबोधित कर सत्र का शुभारंभ किया था।
Frequently Asked Questions
सभी दलों की बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उसके भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को समझना है। सरकार विपक्षी दलों को अपडेट देना चाहती है ताकि देश की विदेश नीति पर एकता बनाए रखी जा सके।
किस政党 ने इस बैठक में हिस्सा नहीं लिया?
त्रिणामूल कांग्रेस (TMC) ने इस बैठक में हिस्सा नहीं लिया। पार्टी ने इससे इंकार किया क्योंकि वे मानते हैं कि जब संसद चल रही है, तो विरोधक मंच पर ही चर्चा होनी चाहिए, कॉन्फ्रेंस रूम में नहीं।
क्या रक्षा मंत्रालय ने कोई कार्यवाई शुरू की है?
हाँ, रक्षा मंत्री रज्जन सिंह ने 24 मार्च को सीडीएस जनरल अनिल चौहान सहित अन्य सुरक्षा अधिकारियों के साथ हाई-लिवल समीक्षा बैठक की ताकि क्षेत्रीय चुनौतियों के खिलाफ तैयारियों का मूल्यांकन किया जा सके।
इस संकट का आम जनता पर क्या असर पड़ सकता है?
बाजार में अस्थिरता और एलपीजी सिलेंडर की कमी जैसे मुद्दे उभर आए हैं। अगर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा, तो ऊर्जा लागत और अन्य व्यापारिक कार्यों में भारी प्रभाव पड़ सकता है, जिसे सरकार निगरानी में रख रही है।